उमराह से लौट रहे डॉक्टर की सड़क हादसे में मौत, नम आंखों से किए गए सुपुर्द-ए-खाक Al Hind Khabarnama
मुजफ्फराबाद/समाचार
इबादत के मुकद्दस सफर उमराह से लौट रहे मुजफ्फराबाद क्षेत्र के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. आबिद अली की सड़क हादसे में मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को जोहर की नमाज के बाद उन्हें उनके पैतृक गांव पठलोकर के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके अंतिम सफर में हजारों की संख्या में उमड़े जनसैलाब ने नम आंखों से अपने चहेते डॉक्टर को विदाई दी।
हादसा शनिवार देर रात करीब दो बजे गागलहेड़ी-मुजफ्फरनगर स्टेट हाईवे पर साधारण सिर चौराहे के पास हुआ। डॉ. आबिद सऊदी अरब से उमराह कर लौटे थे और उनके परिजन उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर घर आ रहे थे। रास्ते में उनकी कार आगे चल रहे एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि 40 वर्षीय डॉ. आबिद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी दोनों पत्नियां, 8 वर्षीय बेटा और दो सालों सहित सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
जैसे ही डॉ. आबिद के इंतकाल की खबर क्षेत्र में फैली, बाजारों में सन्नाटा पसर गया। रविवार दोपहर को उनके अंतिम संस्कार (जनाजे) में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हुए। इसमें स्थानीय ग्राम प्रधानों, राजनीतिक हस्तियों, चिकित्सकों और धार्मिक गुरुओं ने शिरकत की।
ग्राम प्रधान शमीम कासमी, डॉ. राव गुलबाहर, जाकिर प्रधान, बीडीओ योगेंद्र चौधरी, और कई मौलानाओं ने उनके निधन को समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।
डॉ. आबिद केवल अपनी डॉक्टरी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी मिलनसारिता और गरीबों की मदद के लिए भी जाने जाते थे। मुजफ्फराबाद क्षेत्र में उन्हें एक सक्रिय समाजसेवी के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त था। स्थानीय लोगों के अनुसार, वे चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र के असहाय लोगों की समस्याओं को हल कराने में हमेशा आगे रहते थे।
"डॉ. आबिद का मुस्कुराता चेहरा और निस्वार्थ सेवा भाव हमेशा याद रखा जाएगा। उनका जाना पूरे समाज के लिए एक बड़ा घाव है।" — शमीम प्रधान, मुजफ्फराबाद

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